बवासीर क्या होता है? जानें इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तों, आज के लेख का शीर्षक है “बवासीर क्या होता है? जानें इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी”।यह लेख बवासीर बीमारी के बारे में है जिससे पुरुष और महिलाऐं दोनों बराबर पीड़ित हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में बताते वक्त लोग काफी संकोच करते हैं।

इस बीमारी को कई नामों से जाना जाता है जैसे बवासीर, Piles, Hemorrhoids और मुळव्याध आदि। बवासीर नाम की बीमारी हमारे ख़राब जीवनशैली और आहारशैली से उत्पन्न हुई समस्या का परिणाम है। आज मैं इस बवासीर नाम की बीमारी के बारे में आपको विस्तार से बताऊंगा, इसलिए पूरी जानकारी के लिए आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।

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बवासीर क्या होता है?

बवासीर रोग जिसे (Piles या Hemorrhoids) भी कहा जाता है, यह गुदा और निचले मलाशय में Varicose Veins के समान सूजी हुई नसें होती हैं। बवासीर मलाशय के अंदर होती है या मगर यह गुदा के आसपास भी हो सकती है। बवासीर होने के कई कारण होते हैं, लेकिन अक्सर इसका कारण अज्ञात होता है। यह मल त्याग करते समय ज्यादा जोर लगाने से या गर्भावस्था में गुदा की नसों पर दबाव बढ़ने से भी हो सकता है।

वैसे तो हम सभी बवासीर के साथ ही पैदा होते हैं, लेकिन उसका स्तर सामान्य होने की वजह से वे हमें परेशान नहीं करते हैं। मगर जब वे सूज जाते हैं और बढ़ जाते हैं तो ये तकलीफ देने लगते हैं और साथ ही मलाशय से रक्तस्राव का कारण भी बन सकते हैं। इन परिस्थितियों में आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

आजकल बवासीर के इलाज के लिए कई प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं। गर्भावस्था में पैदा हुई बवासीर तो समय के साथ ठीक हो जाती है। कब्ज के कारण हुई बवासीर में राहत पाने के लिये लोगों को घरेलू उपचार, आहार और जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी होता है। इसके अलावा दवाओं और ऑपरेशन की मदद भी ले सकते हैं।

बवासीर किसे हो सकता है?

लाक्षणिक बवासीर किसी को भी हो सकता है, एक किशोर को भी (चूंकि बवासीर बढ़ने में थोड़ा समय लेती है, इसलिए बच्चों में यह असामान्य है।) यदि आप-

  • मोटापे से ग्रस्त हैं।
  • गर्भवती हैं।
  • कम Fiber वाला आहार लेते हैं।
  • पुरानी कब्ज है।
  • वजनी वस्तुओं को नियमित रूप से उठाते हैं।
  • शौचालय में काफी समय बिताते हैं।
  • मल त्याग करते समय जोर लगाते हैं।

बवासीर कितने प्रकार की होती है?

बवासीर मुख्यतः चार प्रकार की होती है, बवासीर मलाशय के अंदर या बाहर हो सकता है। यह इसके प्रकार पर निर्भर करता है कि सूजी हुई नसें कहाँ विकसित हो रही हैं। प्रकारों में शामिल हैं:

1. Internal बवासीर

इस प्रकार की बवासीर मलाशय के अंदर होती हैं जिनको देखना या हाथ से छूकर महसूस करना मुश्किल होता है। इनसे हमें कोई परेशानी नहीं होती है क्योंकि मलाशय में दर्द-संवेदी नसें कम होती हैं। कई मामलों में सिर्फ रक्तस्राव ही एकमात्र संकेत हो सकता है।

2. External बवासीर

इस प्रकार की बवासीर मलद्वार के ऊपर होती है, और वहीं विकसित होती है (जहाँ से मल त्याग करते हैं )। ये मलाशय के द्वार पर गांठ की शक्ल में रहते हैं इसे देख और महसूस कर सकते है। बाहरी बवासीर में खुजली और दर्द हो सकता है। कभी-कभी खून भी बहता हैं। आमतौर पर यह गंभीर नहीं होते हैं, यदि इसमें दर्द और तकलीफ की वजह आपको परेशानी हो रही है तो डॉक्टर दिखा देना चाहिए।

3. Prolapsed बवासीर

जब आंतरिक बवासीर की नसें फूलकर फ़ैलने लगती हैं या बढ़ जाती हैं तब यह गुदा मार्ग से बाहर निकलने लग जाती हैं। उस स्थिति में इसे बाहर देखा जा सकता है। Prolapsed बवासीर में कपड़ों से रगड़ने और बैठने से चोट लग सकती है। इसे धीरे से गुदा में धकेला भी जा सकता है।

4. Thrombosed बवासीर

जब एक बाहरी बवासीर के अंदर खून के थक्के बनते हैं, और संभवतः खून भी बह सकता है। यह आमतौर पर गंभीर नहीं होते हैं, मगर दर्दनाक सूजन पैदा करता है। यदि दर्द असहनीय है, तो Thrombosed बवासीर को सर्जरी से हटाया जा सकता है, जिससे दर्द बंद हो जाता है।

बवासीर के लक्षण

ज्यादातर मामलों में, बवासीर के लक्षण गंभीर नहीं होते हैं। वे आम तौर पर कुछ दिनों के बाद अपने गायब हो जाते हैं।

निम्नलिखित लक्षणों को बवासीर से पीड़ित व्यक्ति महसूस कर सकता है:

  • गुदा क्षेत्र में एक सख्त, दर्दनाक गांठ महसूस होना।
  • मल त्याग करने के बाद भी पेट भारी-भारी महसूस होना।
  • मल त्यागते समय रक्तस्राव होना।
  • गुदा के आसपास रुक रुक कर खुजली होना।
  • मल त्याग के दौरान दर्द होता है।

बवासीर की स्थिति अधिक गंभीर होने पर:

  • गुदा से अत्यधिक रक्तस्राव, जो संभवतः एनीमिया का कारण भी बन सकता है
  • गुदा क्षेत्र में संक्रमण
  • मल त्याग को नियंत्रित ना कर पाना
  • गुदा के अंदर या सतह पर नासूर बनना।

बवासीर के कितने Grade हैं?

लक्षणों के आधार पर आंतरिक बवासीर को चार Grade में वर्गीकृत किया जाता है:

  • Grade1 बवासीर में सूजन कम होती है, आमतौर पर दर्द रहित होती है। यह गुदा की परत के अंदर रहती है और दिखाई नहीं देती है।
  • Grade 2 बवासीर में सूजन थोड़ी बड़ी होती है, लेकिन गुदा के अंदर ही होती है। मल त्याग करते समय जोर लगाने पर मामूली खून के साथ गांठ बाहर आ जाती है। लेकिन मल त्याग के बाद गांठ अपने आप अंदर चली जाती है।
  • Grade 3 बवासीर को ‘ Prolapsed Hemorrhoids ‘ भी कहा जाता है; ये गुदा के बाहर दिखाई देते हैं। व्यक्ति उन्हें मलाशय से लटकता हुआ महसूस कर सकता है। उन्हें आसानी से फिर से अंदर धकेला जा सकता है।
  • Grade 4 बवासीर की गाठें बढ़कर गुदा के बाहर निकल आती हैं और इन्हें वापस धकेला नहीं जा सकता। गांठें कभी-कभी काफी बढ़ जाने के कारण गुदा से बाहर रहते हैं।

बवासीर होने का क्या कारण है?

पेट के अत्यधिक दबाव से गुदा या मलाशय की नसों पर दबाव पड़ने से की गुदा नसें सूज जाती हैं, जिससे बवासीर हो जाता है। यह Varicose Veins के रूप में गुदा मार्ग को प्रभावित करती हैं।

किसी भी प्रकार का दबाव जो आपके पेट या निचले हिस्से पर दबाव बढ़ाता है, और गुदामार्ग व मलाशय की नसों में सूजन का कारण बनता है, जिससे बवासीर विकसित हो सकता है। यहाँ नीचे कुछ ऐसी ही स्थितियां बताई गई हैं, जो बवासीर के विकसित होने की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देती हैं:

  • कब्ज- कब्ज़ के कारण शौचालय में देर तक बैठना। ये गुदा में और आसपास की नसों पर दबाव डालते हैं और बवासीर के विकसित होने का एक सामान्य कारण प्रतीत होता है।
  • बहुत मोटा होना- इससे आपको पाइल्स होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था- गर्भावस्था के दौरान बवासीर होना आम है। यह शायद मलाशय और गुदा के ऊपर लेटे हुए बच्चे का वजन बढ़ने से पेल्विक पर दबाव के कारण होता है, और यह भी कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में बदलाव का नसों पर प्रभाव पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले बवासीर अक्सर बच्चे के जन्म के बाद दूर हो जाते हैं।
  • उम्र बढ़ने पर- जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, गुदा के अंदरूनी ऊतक कमजोर हो सकते हैं, जिसके कारण बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।
  • वंशानुगत कारक- कुछ लोगों को बवासीर की बीमारी विरासत में मिल सकती है।
  • गुदा मैथुन- गुदा मैथुन करना भी बवासीर का कारण बन सकता है।
  • भारी वजन उठाना- नियमित रूप से अधिक वजन उठाना।
  • Fiber की कमतरता- कम Fiber वाला खाना भी बवासीर के कारणों में शामिल है।

बवासीर से बचाव कैसे कर सकते हैं?

बवासीर से बचने का आसान तरीका यह है, कि किसी भी तरह से मल को नरम बनायें। ताकि वह आसानी से मलद्वार निकल जाए। मल को नरम बनाने में शारीरिक गतिविधियों (व्यायाम व योग) के अलावा फाइबर युक्त आहार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए आपको अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में Fiber करीब 20 से 30 ग्राम प्रति दिन लेना चाहिए।

बवासीर के लक्षणों को कम करने के लिए, इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  • उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खाएं- अपने खाने में हरी और पत्तेदार सब्जियां फल और साबुत अनाज को खाएं। ऐसा करने से मल नरम हो जाता है और उसका आकार भी बढ़ जाता है, जिससे आपको उस दबाव से बचने में मदद मिलेगी जो बवासीर का कारण बन सकता है। मगर आपको अपने आहार में फाइबर को थोड़ा थोड़ा करके शामिल करना है, क्योंकि कुछ लोगों को इससे गैस की समस्या हो सकती है।
  • तरल पदार्थ या पानी अधिक मात्रा में पियें- मल को नरम रखने में मदद के लिए, यदि आप फाइबर की खुराक का उपयोग करते हैं, तो हर दिन कम से कम छह से आठ गिलास पानी या अन्य तरल पदार्थ अवश्य पियें। अन्यथा, इससे आपको कब्ज की समस्या पैदा हो सकती है।
  • ज्यादा जोर ना लगाएं- मल त्याग करने की कोशिश करते समय ज्यादा जोर ना लगायें, इससे मलाशय की अंदरूनी नसों पर अधिक दबाव पड़ता है।
  • मल त्याग की इच्छा को न दबाएं- यदि आपको मल त्याग करने की इच्छा को दबाने की आदत है तो यह सही नहीं है। क्योंकि इससे आपका मल सूखकर सख्त हो सकता है, जिससे मलत्याग की प्रक्रिया कठिन हो सकती है।
  • व्यायाम- नियमित व्यायाम की आदत से कब्ज को रोकने और नसों पर दबाव कम करने में मदद मिलती है, जो लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने से हो सकता है। व्यायाम करने से आपका अतिरिक्त वजन तो कम होगा, साथ ही बवासीर में लाभ पहुंचा सकता है।
  • शौचालय में अधिक देर तक बैठने से बचें- शौचालय में बहुत देर तक बैठने से, गुदा की नसों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए देर तक बैठने से बचें और आप टॉयलेट में मोबाइल या पेपर ले जाने की आदत ना डालें, शौचालय में केवल उतना ही समय बिताएं जितना जरूरी हो।

बवासीर का निदान कैसे करते हैं?

आमतौर पर डॉक्टर बवासीर वाले किसी व्यक्ति के गुदा की जांच करने के बाद ही बवासीर का निदान कर सकता है।

आपकी Medical History पता करने के लिए डॉक्टर आपसे निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकता है और लक्षणों के आधार पर कुछ परीक्षण भी कर सकता है:

  • क्या किसी करीबी रिश्तेदार को बवासीर है?
  • क्या मल के साथ खून या बलगम आता है?
  • क्या हाल ही में आपका वजन घटा है?
  • क्या हाल ही में मल त्याग में कुछ बदलाव आया है?
  • मल का प्रकार और किस रंग का होता है?

बवासीर का परीक्षण

  • Digital Rectal Examination: इसमें डॉक्टर गुदा में ऊँगली डालकर सूजी हुई नसों या असामान्य गाठों का पता लगाता है। कुछ लोगों को रेक्टल परीक्षण (Rectal Examination) करवाने में संकोच हो सकता है। हालांकि इसके लिए कुछ मिनट ही काफी होते हैं, और इस परीक्षण से कोई तकलीफ भी नहीं होती है।
  • Anoscopy: डॉक्टर गुदा और मलाशय के अंदर देखने के लिए एनोस्कोपी करता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो आपके गुदा और मलाशय की परत को देखने के लिए Anoscope नामक एक छोटी ट्यूब का उपयोग करते हैं।
  • Sigmoidoscopy: यह एक नैदानिक ​​परीक्षण है Sigmoidoscope (एक कैमरे के साथ Tubelight) का उपयोग डॉक्टर Lower Sigmoid की जांच के लिए करते हैं। जो आपके बड़ी आंत का निचला हिस्सा होता है। यह भाग आपके मलाशय और गुदा के करीब होता है। जब मल के साथ गुदा से खून आता तो उसका पता लगाने के लिए Sigmoidoscopy की जाती है। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर Colon Cancer की जाँच के लिये Colonoscopy कर सकता है।

बवासीर का उपचार क्या है?

अधिकांश मामलों में, बवासीर बिना किसी उपचार के अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि बहुत से लोगों को उपचार के बाद ही बवासीर से होने वाले दर्द और खुजली से राहत मिलती है।

जीवनशैली में बदलाव लायें

उच्च फाइबर युक्त आहार लेने से स्थिति को रोकने और इलाज में मदद मिल सकती है। बवासीर का उपाय करने के लिए डॉक्टर शुरू में ही आपको जीवनशैली में कुछ बदलाव लाने की सलाह देगा।

  • भरपूर मात्रा में फाइबर को खाने में शामिल करें (जैसे फल, हरी सब्जियां, अनाज, और साबुत अनाज की रोटी इत्यादि)। ताकि आप कब्ज से बचे रहें और बवासीर की गंभीरता कम हो सके।
  • डॉक्टर बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को पानी अधिक पीने की सलाह भी दे सकते हैं।
  • मोटापा और वजन कम करने से भी बवासीर की उग्रता को कम करने में मदद मिलती है। यदि उच्च फाइबर युक्त आहार आपकी मदद नहीं कर पा रहा है, तो आप Fiber Supliments (Bulking agents) जैसे Unprocessed wheat bran (चोकर), Ispaghula Husk, Methylcellulose और Sterculia ले सकते हैं।
  • कुछ दर्द निवारक दवाओं को लेने से बचें जिनमें Codeine होता है, जैसे Co-codamol, क्योंकि ये दवाएं कब्ज का कारण बन सकती हैं। हालांकि, Paracetamol जैसी साधारण दर्द निवारक दवाएं ले सकते हैं।
  • शौचालय जाने की जरूरत महसूस होने पर जल्द से जल्द शौचालय जाएं। शौच को रोकने की कोशिश ना करें, शौचालय में ज्यादा देर तक ना बैठें और ना ही जोर लगाएं ।
  • नियमित व्यायाम करने से कब्ज और मोटापे को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही सेहत भी दुरुस्त रहती है।
  • ऊपर बताये गये उपाय अक्सर बवासीर के लक्षणों जैसे रक्तस्राव और पीड़ा को कम करेंगे। ऐसा भी हो सकता है कि इससे आपको बवासीर (Grade1) का इलाज करने की आवश्यकता ही ना पड़े। (Grade1) बवासीर की गांठें अक्सर समय के साथ ठीक हो जाती हैं।

बवासीर के लिए दवाएं

बवासीर वाले व्यक्ति के रोग के लक्षणों को अधिक आरामदायक बनाने के लिए यहाँ कुछ मेडिकल विकल्प बताये गए हैं –

Over-the-Counter (OTC) दवाएं- Over-the-Counter दवाओं में दर्द निवारक मलहम क्रीम और पैड शामिल हैं और गुदा के आसपास लालिमा और सूजन को शांत करने में मदद कर सकते हैं। OTC बवासीर का इलाज नहीं है सिर्फ लक्षणों को दूर करने में मददकरसकतेहैं। उनका उपयोग लगातार 7 दिनों से ऊपर न करें क्योंकि ये गुदा क्षेत्र के आसपास की त्वचा में जलन और पतलेपन का कारण बन सकते हैं। डॉक्टर की सलाह पर ही एक समय में दो या दो से अधिक दवाओं का उपयोग करें अन्यथा ना करें।

Corticosteroids- Rectal Corticosteroids का उपयोग सूजन, खुजली और कुछ अन्य रेक्टल समस्याओं की परेशानी को दूर करने में मदद करने के लिए भी किया जाता है, जिसमें Radiation Therapy के कारण मलाशय की सूजन भी शामिल है।

जुलाब (Laxatives) की दवा- यदि बवासीर वाले व्यक्ति को कब्ज की शिकायत है तो डॉक्टर जुलाब की दवा लिख सकते हैं। जिससे मल अधिक आसानी से पास हो सके।

बवासीर की सर्जरी या अन्य उपचार

Banding- Banding सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बवासीर उपचार है, विशेष रूप से Grade2 और Grade3 बवासीर के लिए। डॉक्टर गुदा में एक Proctoscope की मदद से, बढ़े हुए बवासीर के आधार के चारों ओर एक छोटा रबर बैंड लगाते हैं। बैंड बवासीर को रक्त की आपूर्ति बंद कर देता है, तब बवासीर सिकुड़ने लगता है और तीन से पांच दिनों में गिर जाता है।

बैंडिंग के बाद बहुत कम लोगों को समस्याएं होती हैं, जैसे रक्तस्राव, संक्रमण या उपचारित स्थान पर अल्सर, या मूत्र संबंधी समस्याएं।लगभग 2 से 10 मामलों में, बवासीर किसी न किसी स्तर पर वापस आ जाता है। (हालांकि, यदि ऐसा होता है तो आप एक बार और बैंडिंग उपचार करा सकते हैं।)

Sclerotherapy (Injection)- बवासीर के आस-पास के क्षेत्र में एक Chemical Solution (sclerosant) का इंजेक्शन देते है जिसके फलस्वरूप Scarring Reaction से बवासीर धीरे-धीरे कम होकर सूख जाता है। यह आमतौर पर Grade1 और Grade2 बवासीर के लिए प्रभावी है।

Infrared Coagulation / Photocoagulation- बवासीर के उपचार की यह विधि बवासीर को जलाने और प्रसार को रोकने के लिए Infrared का प्रयोग करते हैं, जिससे यह आकार में सिकुड़ जाता है। यह पहली और Grade2 के बवासीर के लिए Banding उपचार और Sclerotherapy जितना ही प्रभावी है।

Diathermy and Electrotherapy- इसे Electrocoagulation भी कहते हैं, इस प्रक्रिया में बवासीर को नष्ट करने के लिए Electricity का प्रयोग करते हैं। Grade1 बवासीर के लिए यह एक और विकल्प है, खासकर उनके लिये जिनका इलाज Banding से नहीं किया जा सकता है। Proctoscope को गुदा में डालकर गाठों का पता लगाते हैं, फिर उसमें Electric Current देकर जला देते हैं। Infrared Coagulation के समान इसकी भी सफलता दर है और जोखिम भी कम है।

Hemorrhoidectomy (पारंपरिक ऑपरेशन)- बवासीर बढ़ी हुई गाठों को Operation द्वारा काटकर निकाल देते हैं। इस तरह का Operation Grade3 या Grade4 जैसी बवासीर का इलाज करने का एकमात्र विकल्प है। इस तरह की बवासीर के लिए यह Operation काफी सफल माना जाता है।

Stapling- बवासीर की Stapling एक नई तकनीक है, जिसे आमतौर पर Grade3 बवासीर के उपचार में उपयोग किया जाता है। इसमें पहले बढ़े हुए बवासीर के ऊतकों को हटाते हैं, और फिर बचे हुए ऊतकों को फिर से गुदा की परत में “Staple” कर देते हैं।

बवासीर की संभावित जटिलताएं क्या हैं?

बवासीर का समय पर इलाज ना किया जाये तो, उसकी जटिलतायें बढ़ जाती हैं जिनमें शामिल हैं:

  • Anemia (एनीमिया)- शायद ही कभी, पुरानी बवासीर से खून के बहाव की कमी से Anemia हो सकता है।
  • रक्त की आपूर्ति बंद होना- यदि आंतरिक बवासीर को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाये, तो बवासीर में अत्यधिक दर्द हो सकता है, और यहां तक कि Gangrene भी हो सकता है।
  • खून का थक्का बनना- कभी-कभी, बवासीर (Thrombosed Hemorrhoids) में खून का थक्का बन सकता है। हालांकि खतरनाक नहीं है, पर बेहद दर्दनाक हो सकता है और ऐसे में इसको चीरकर बहा देना ठीक होता है।
  • Infection- अधिक दिनों तक बवासीर का इलाज ना कराने पर गुदा मार्ग में Infection भी हो सकता है।

बवासीर के लिए कुछ Tips-

बवासीर होने का मुख्य कारण है, आपकी दोषपूर्ण जीवन शैली और गलत आहार। आहार और जीवन शैली में बदलाव ही बवासीर के इलाज के लिए प्रभावी होता है। यदि आप बवासीर के दर्द को कम करना चाहते हैं, तो नीचे कुछ Tips दिये गये हैं उनका पालन करने से आपको बवासीर की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

बवासीर के लिए आहार

बवासीर की समस्या के मूल में आपका पेट है। क्योंकि पेट से सम्बंधित किसी भी समस्या का सीधा असर आपके बवासीर की समस्या पर हो सकता है। इसलिए बवासीर के लिए सही आहार खाएं मतलब क्या खाना है क्या नहीं। कहते हैं ना ‘पेट सही तो सब सही’। इसलिए उचित आहारशैली को अपनाएं जिससे आपको बवासीर की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

क्या खायें-

वह खाएं जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक हो और आसानी से पच जाए –

अनाज- ओट्स, मक्का, गेहूं, चोकर युक्त आटा, बाजरा, दालें, बीन्स

फल- अंजीर, पपीता, अनार, ब्लैकबेरी, जामुन, सेब, अंगूर

सब्जियां- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फूलगोभी, पत्तागोभी, गाजर, ककड़ी, प्याज, अदरक और लहसुन, चुकंदर

सूखे मेवे- बादाम, अखरोट, अलसी, पिस्ता

क्या ना खायें-

अनाज- नया चावल, मैदा।

फल एवं सब्जियां- आलू, शिमला, मिर्च, कटहल, बैंगन, भिंडी, आड़ू, कच्चा आम, सभी मिर्च।

सख्त मना- तेल, मसालेदार खाना, बेकरी उत्पाद, डेरी उत्पाद, जंक फ़ूड, मांसाहार, धूम्रपान और शराब का सेवन।

व्यायाम/कसरत करें- बवासीर के लिए व्यायाम करें क्योंकि मोटापा बवासीर और आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्वस्थ शरीर के लिए वजन को नियंत्रण में रखें। उसके लिए आप योगासन करें जैसे पवनमुक्तासन, बालासन, सर्वांगासन, भुजंगासन आदि बवासीर के लिये बेहद फायदेमंद हैं।

Sitz Bath- Sitz Bath या Hip Bath बवासीर के कारण हुई सूजन, ऐंठन और दर्द को कम करने में बेहद फायदेमंद है। जिसमें व्यक्ति कूल्हों तक पानी में बैठता है। इसका उपयोग शरीर के निचले हिस्से में बेचैनी और दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है। यह Affected Area को साफ और उसमें रक्त प्रवाह को बढ़ाने का काम करता है।

अंत में…

ऊपर आपने बवासीर के बारे में पढ़ा कि कैसे हमारी ख़राब जीवनशैली और आहारशैली की वजह से यह बीमारी हमें काफी तकलीफ देती है। हालाँकि, बवासीर लाइलाज नहीं है, पर इसके कारण हमें कभी कभी बहुत तकलीफ से गुजरना पड़ता है।

हम अगर अपने जीवनशैली में थोड़ा सा बदलाव लाते हैं, तो इस बीमारी के प्रकोप को काफी हद तक कम कर सकते हैं। जिसका फायदा हमें उपचार के दौरान अवश्य महसूस होगा।

 

दोस्तों, आज का यह लेख आपको कैसा लगा नीचे बॉक्स में कमेंट जरूर करें। आपके कमेंट से ही मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलेगी जिससे मैं अलग अलग विषयों पर अधिक जानकारी आप लोगों से शेयर कर पाउँगा। इस पोस्ट को आप सभी लोग अपने सोशल मीडिया पर लाइक और शेयर जरूर करें, जल्द वापस आऊंगा एक नयी पोस्ट के साथ।

Disclaimer

यह लेख केवल शिक्षा के उद्देश्य से बीमारियों और स्वास्थ्य के बारे में लोगों को सचेत करने का एक साधन मात्र है। हमेशा कोशिश रहती है कि हर लेख संपूर्ण और सटीकता से परिपूर्ण हो।इस Blog पर मौजूद किसी भी सलाह, सुझावों को निजी स्वास्थ्य के लिए उपयोग में लाने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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Ashok Kumar
Ashok Kumar

नमस्कार दोस्तों,
मैं एक Health Blogger हूँ, और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में शोध-आधारित लेख लिखना पसंद करता हूँ, जो शिक्षाप्रद होने के साथ प्रासंगिक भी हों। मैं अक्सर Health, Wellness, Personal Care, Relationship, Sexual Health, और Women Health जैसे विषयों पर Article लिखता हूँ। लेकिन मेरे पसंदीदा विषय Health और Relationship से आते हैं।

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